ब्रह्म मुहूर्त का समय | योगासन के साथ 10 अच्छी बातें

अमृत बेला है ब्रह्म मुहूर्त

सुबह तीन से पांच बजे तक का समय ब्रह्ममुहूर्त माना जाता है। शास्त्रों में ब्रह्ममुहूर्त में ही जागने की बात क्यों कही गई है?

स्वस्थ व्यक्ति ही समाज को कुछ प्रदान कर सकता है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार, स्वस्थ तन में ही स्वस्थ मन निवास करता है और अच्छा स्वास्थ्य हमारी नियमित दिनचर्या पर निर्भर करता है।
हमारी दिनचर्या की शुरुआत होती है सुबह जगने से। यदि स्वस्थ जीवन की चाह है, तो हमें प्रात: काल ब्रह्ममुहूर्त में ही जागना चाहिए।

प्राण ऊर्जा का प्रवाह

हमारे वैदिक ग्रंथ भी हमें ब्रह्ममुहूर्त में उठने की महत्ता बताते हैं। प्रातः काल 3-5 बजे तक का समय ब्रह्म मुहूर्त का समय माना जाता है। इस समय फेफड़ों में प्राण ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है , जो व्यक्ति इस समय जागकर शुद्ध वायु का सेवन करते हैं, प्राणायाम करते हैं, इससे उनके फेफड़े सशक्त होते हैं। वे स्वस्थ्य रहते हैं।

जब सूर्य उगने वाला होता है, तो पूर्व क्षितिज में थोड़ी लालिमा दिखाई देती है। इस समय को अमृत बेला भी कहा जाता है। प्रकृति के नियमानुसार, पशु-पक्षी समेत संसार के ज्यादातर प्राणी इस समय जागकर इस सुंदर बेला का अनुभव करते हैं।

स्मरण शक्ति में वृद्धि

हमें ब्रह्म मुहूर्त में जागकर नित्यादि कर्मों से निवृत्त होकर सबसे पहले धर्म और ग्रंथ का चिंतन करना चाहिए। मनु अपनी मानव संहिता में लिखते हैं – “ब्राहो मुहूर्ते बुध्येत् धर्मार्थो तानुचिंतयेत कायक्लेशांच्श तन्मूलान वेद तत्त्वार्थमेव च।

ब्राह्ममुद्ध में जागकर सबसे पहले धर्म और अर्थ का चिंतन करना चाहिए। हमें परम शक्ति परमेश्वर का स्मरण करना चाहिए। स्मरण करते हुए हमें यह निश्चय करना चाहिए कि पूरे दिन परिश्रम और ईमानदारी से धनोपार्जन करेंगे। यदि शरीर में किसी प्रकार का कोई कष्ट है, तो उसके निवारण का प्रयास करेंगे।

वैज्ञानिक शोधों के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त में प्राणवायु को अधिकता होती है। । इस समय पियुष और पिनियल ग्रंथियों से हार्मोंस निकलते हैं, जो मस्तिष्क की स्मरण शक्ति को बढ़ाते हैं। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में जागने वाले व्यक्ति अन्य लोगों की अपेक्षा अधिक स्वस्थ, बुद्धिमान, सक्रिय और सजग होते हैं। ऐसे लोगों में आलस्य कम होता है। इस समय किया गया प्राणायाम, योग, आसन और ध्यान जीवन में चमत्कारी परिणाम देते हैं।

गुड मोर्निंग अच्छी बातें

साधना का समय

बह्म मुहूर्त में वातावरण में शांति छाई रहती है। यदि हम सूक्ष्मता से निरीक्षण करें, तो आसमान में सूर्य की लालिमा छाने से पहले चिड़ियों को चहचहाहट सुनाई देने लगती है। मानो वे हमें मंदेश दे रही हों कि सवेरा होने को आया, अब बिस्तर छोड़ दो।

यदि आप ध्यान में जाना चाहते हैं, तो चारों ओर फैली शांति आपकी सहायता करती है। इसलिए यह साधना के लिए भी उत्तम समय माना गया है। वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि प्रातः कालीन वायु शरीर, मन और बुद्धि के लिए हितकारी होती है। प्रदूषणरहित हवा हमारे हृदय के लिए भी अच्छी होती है। इसलिए इस मुहुर्त में टहलना हमारे लिए लाभप्रद होता है

पूर्व के साथ-साथ पाश्चात्य जगत की कहावतों में भी सुबह जल्दी जागने की सलाह दी जाती है। अर्ली टू बेड अर्ली टू राइज। इट मेक्स ए मैन हेल्दी, वेल्दी ऐंड वाइज। देर रात्रि तक जागना, पार्टीज अटैंड करना, क्लब ज्वॉइन करना, टीवी देखना, फिर सुबह आठ-नौ बजे जागना, यह आज अधिकांश लोगों की दिनचर्या बनती जा रही है। सच तो यह है कि देर से जागने से आयु, विद्या, यश, बल और लक्ष्मी का विनाश होता है।

इसलिए हमें प्रण करना चाहिए कि प्रातः काल जागें और स्वस्थ तन-मन से अपने परिवार, समाज और देश को अपना सर्वोतम प्रदान करें।

ध्यान लगाने से बढ़ती है एकाग्रता

सेहत का साथ : अच्छी बातें

यदि आप लंबे समय तक एक जगह ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं, तो मात्र पांच मिनट एकाग्र होकर ध्यान लगाएं। ध्यान लगाने से पहले कुछ बातों का ख्याल रखें

ध्यान लगाने के लिए दिमाग का शांत होना बहुत जरूरी है। मस्तिष्क शांत होगा तभी चेतना प्रखर होगी और शांति का अहसास होगा

अपनी सारी समस्याओं को भूल कर ध्यान पर मन को केंद्रित करना चाहिए ।

ध्यान लगाने के लिए ऐसे  स्थान (जगह ) का चुनाव करें जहां शोर न हो। वहां पर अपने इष्ट देव, गुरु या फूलों की तस्वीर लगाएं । एक ही जगह पर लगातार ध्यान लगाने से वहां पर इसका माहौल बनने लगता है।

शुरुआत करते ही परिणाम की इच्छा न रखें। इसका परिणाम धीरे-2 मिलता है। अगर आपका अनुभव अच्छा नहीं हैं, तो दृढ़ता की आवश्यकता है। ईमानदारी से प्रयास करने पर ही सफलता मिलेगी।

ध्यान हमारी संवेदनशीलता को बढ़ाता है। इसके लिए जिंदगी के प्रति सकरात्मक सोच रखना बहुत जरूरी है।

ब्रह्म मुहूर्त

सेहत का साथ

परेशानियां जिंदगी का हिस्सा हैं। इसके लिए दूसरों या खुद को कोसने की बजाए इसका हल तलाशें।

नकारात्मक सोच जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदल देती है। अपनी सोच सकारात्मक रखें। खुशियां तो आसपास बिखरी हैं। जरूरत है तो बस, इन्हें समेटने की ।
इन बातों का रखें ख्याल…

  • परेशानियों से कभी हार नहीं माननी चाहिए। परेशानियों में उलझने की बजाए उन्हें दूर करने पर
    ध्यान केंद्रित करें।
  • छोटी-छोटी बातों में ढेरों खुशियां छुपी होती हैं। इन खुशियों का स्वागत दिल खोल कर करें। खूब हंसे और मुस्कुराएं।
  • आपकी कुछ आदतें भी परेशानी का कारण बनती हैं। इस बात को समझें.. बेहतर होगा, इनमें सुधार लाने की कोशिश करें।
  • आलस्य से बचें। जहां तक हो वाद-विवाद से दूर रहने की कोशिश करें। अपने सहयोगियों के साथ
    रुखा व्यवहार न करें।
  • प्रतिदिन कुछ समय अपने उन पसंदीदा कामों के लिए निकालें, जिनसे आपको खुशी मिलती हो। जैसे बागवानी, संगीत, डांस, टीवी या किताबें पढ़ना।
  • गरीब और असहाय लोगों की यथासंभव मदद करने की कोशिश करें। इससे मिलने वाली खुशी का आनंद लें।
  • वर्तमान को जिएं। पुरानी बातें को सोचकर परेशान होने के बजाए वर्तमान को संवारें।

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